Monday, May 17, 2021

हिमालय की बेटियाँ (पाठ का सार,कठिन शब्दार्थ और अभ्यास के प्रश्न-उत्तर

 

पाठ - हिमालय की बेटियाँ

(लेखक – नागार्जुन)

 

पाठ का सार

लेखक ने अब तक गंगा ,यमुना,सतलुज जैसी नदियों को मैदानी भागों में ही देखा था | वह उनके प्रति आदर और श्रद्धा के भाव रखता था | इन नदियों की धारा उसे माँ , मौसी  या नानी की गोद- सी सुखद लगती थी |

नदियाँ अपने घर में – इन नदियों को उनके अपने घर यानि हिमालय से देखने से पता चलता है कि यहीं दुबली –पतली , कमजोर सी दिखने वाली नदियां मैदानों में कितना विशाल रूप धारण कर लेती है | अपने घर में हँसने-खेलने  वाली नदियाँ मैदानों में कितनी शांत व गंभीर हो जाती है | यहाँ इनकी लीलाएँ देखकर मन में अनेक जिज्ञासाएँ व आश्चर्यजनक प्रश्न उठते है |लेखक के मन में प्रश्न भी उठता है कि अपने पिता हिमालय का घर छोडकर ये किस लक्ष्य की और बढ़ती जा रही है |बर्फयुक्त  चोटियाँ , हरी-भरी घाटियां , पहाड़ियाँ – यही तो इनका घर है , किन्तु खेलते-खेलते चीड़ और देवदार के जंगलों में चले जाने पर इंका हिमालय चिंतित होता होगा |

हिमालय और उसकी अन्य बेटियाँ – सिंधु ब्रह्मपुत्र का नाम सुनते ही रावी , सतलुज, व्यास, चिनाब ,झेलम, काबुल, गंगा,यमुना, सरयू, कोसी , गंडक आदि हिमालय की अन्य बेटियाँ दिखने लगती है | पिघले हिमालय की एक-एक बूंद दो महानदों के रूप में आगे बढ़ती  है | और समुद्र उनका  माथा थाम लेता है |इनका बाल  रूप पहाड़ के वासियों के लिए भले ही आकर्षक न हो ,परंतु लेखक को अत्यंत मनोहर लगता हैं|

अन्य लेखक और नदियों से उनका संबंध – कालिदास के यक्ष ने मेघदूत से वेतवा नदी का प्रतिदान देने को कहा था | इस कवि को नदी का सचेतक रूप पसंद था | जो व्यक्ति  पहाड़ी घाटियों और समतल आँगनों में अलग – अलग रूप देखेगा,वही इस नतीजे पर पहुंचेगा | काका कालेलकर  इनको लोक-माता के रूप में देखते है |

नदियों के प्रति लेखक की भावनाएँ-लेखक इनके माँ बनने से पूर्व इनको बेटियों के रूप में देखना चाहता है | वह थोड़ा सा और आगे बढ़कर इन्हें प्रेयसी के रूप में देखता है |वह ममता के और धागे अर्थात ‘बहन’ के रूप में भी देखता है |

कठिन शब्दार्थ

गंभीर : संजीदा,शांत

संभ्रांत : धनी, संपन्न

प्रतीत होना :दिखना

आदर : सम्मान

श्रद्धा :  विश्वास

 विशाल : बड़ा

उल्लास : खुशी

कौतूहल : जिज्ञासा

विस्मय : आश्चर्य

लक्ष्य : उद्देश्य

बेचैन : परेशान

विराट : विशाल

अतृप्त: भूखा

जलीय : जलयुक्त

अधित्यकाएँ – पहाड़ी के ऊपर  का समतल भाग

सरसब्ज : हरी-भरी

उपत्यका : घाटी

निकेतन : घर

पट : पर्दा

नटखट : शरारती

मौन : चुप

श्रेय : सौभाग्य

लुभावना : आकर्षक

 विरही : वियोगी

 प्रतिदान : वापस करना

सचेतन : विवेकयुक्त प्राणी

 नटी : नाटक की अभिनेत्री

अद्भुत : विचित्र

 मन उचट जाना: लगाव न रहना

 तबीयत ढीली होना – अस्वस्थ महसूस करना

 

अभ्यास के प्रश्न-उत्तर

प्रश्न)  नदियों को माँ मानने की परंपरा काफी पुरानी है | लेकिन लेखक , नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते है ?

उत्तर ) नदियों को माँ मानने की परंपरा काफी पुरानी है| लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें  बेटी ,बहन, प्रेयसी ,संभ्रात महिला और माँ के रूपों में देखते है |

प्रश्न ) सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई गई है ?

उत्तर )  सिंधु और ब्रह्मपुत्र दो ऐसे महानदी है जिनमे हिमालय की पिघली बर्फ पानी के रूप में एकत्र होकर धीरे धीरेआगे बढ़ती है | इनमें कुछ र छोटी –छोटी नदियां भी मिलती जाती है | समुद्र की ओर अग्रसर होते ये महानदी अंत में समुद्र में मिल जाते है |

प्रश्न ) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है ?

उत्तर ) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्योंकि नदियाँ अपने अमृतरूपी जल से मनुष्य,पशु-पक्षी तथा अन्य जीवों की प्यास बुझाती है | हम इनके जल से खेतों की सिंचाई करते है | जिससे फसले पैदा होती है |मछलियों जैसे कुछ जलचर हमारे भोजन का प्रमुख स्रोत हैं| नदियों के जल में स्नान करने से मनुष्य की गर्मी व थकान दूर होती है |

प्रश्न ) कालिदास को देवात्मा क्यों कहा गया है ?

उत्तर ) कालिदास को देवात्मा इसलिए कहा गया है क्योंकि कालिदास ने अपने काव्यग्रंथ मेघदूत में अल्कापुरी को कैलाश मानसरोवर के निकट बताया है जो देव कुबेर की नगरी है | कैलाश पर्वत जो भगवान शिव का निवास माना जाता है, वह भी हिमालय पर ही स्थित है | अनेक ऋषियों – मुनियों और योगियों का आवास भी हिमालय की गुफाओं में रहा है |

प्रश्न) नदियों से होने वाले लाभों के विषय में चर्चा कीजिए|

उत्तर )

1.       नदियां हमें अमृत तुल्य जल प्रदान करती है जिसे पीकर जीव–जन्तु, पशु-पक्षी और हम सब अपनी प्यास बुझाते है |

2.       नदियों के जल से फसलों की सिंचाई करके फसलें उगाते है |

3.       नदियों से सीप, रेत तथा अनेक उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त की जाती है |

4.       जलीय जीवों तथा मछलियों की आश्रयदाता है |

5.       ये जीव हमारे भोजन और मनोरंजन का साधन बनते है |

6.       नाना प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ  बहाकर हमारा कल्याण करती है |

7.       मछुआरों,नाविकों, पंडित-पुजारी आदि के लिए आजीविका का साधन प्रदान करती है |

प्रश्न) नीचे दिये गए विशेषण और विशेष्य का मिलान कीजिए |

विशेषण                            

विशेष्य

संभ्रांत                          

वर्षा

चंचल                          

जंगल

समतल                        

महिला

घना                             

नदियाँ

मूसलाधार                       

वर्षा

 

उत्तर )

विशेषण

विशेष्य

संभ्रांत     

महिला

चंचल    

नदियाँ  

समतल

आँगन

घना

जंगल

मूसलाधार

वर्षा

प्रश्न) द्वंद्व समास के दोनों पद प्रधान होते है | इस समास में और शब्द का लोप हो जाता है , जैसे – राजा- रानी द्वंद्व समास है जिसका अर्थ है राजा और रानी | पाठ में कई स्थानों पर द्वंद्व समास का प्रयोग किया गया है | इन्हें खोजकर वर्णमाला क्रम (शब्द कोश –शैली ) में लिखिए |

उत्तर) पाठ से द्वंद्व समास के अन्य उदारहण निम्नलिखित है | जिन्हें वर्णमाला क्रम ( शब्द कोश शैली ) में लगाया गया है |

बिना वर्णमाला क्रम के द्वंद्व समास

वर्णमाला क्रम के द्वंद्व समास

दुबली–पतली

छोटी-बड़ी

छोटी-बड़ी

दुबली–पतली

भाव-भंगी

नंग-धड़ंग

माँ-बाप

भाव-भंगी

नंग-धड़ंग

माँ--बाप

                                                            

प्रश्न )  नदी को उल्टा लिखने से दीन  होता है जिसका अर्थ है गरीब | आप भी ऐसे पाँच शब्द लिखिए जिसे उल्टा लिखने पर सार्थक शब्द बन जाए |

उत्तर )

 शब्द                 उल्टा लिखने पर बना सार्थक शब्द अर्थ  ( भेद सहित )

 नदी                 दीन ( भाववाचक संज्ञा )

 नमी                 मीन ( मछली ) जातिवाचक संज्ञा

 राज                 जरा बुढ़ापा ( भाववाचक संज्ञा )

 धारा                 राधा (व्यक्तिवाचक संज्ञा )

 हीरा                 राही (यात्री) जातिवाचक संज्ञा

 नव                  वन (जंगल) जातिवाचक संज्ञा


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