परीक्षा भवन
क ख ग
दिनांक ______
प्रिय नीरज
खुश रहो
हम सब यहाँ कुशलपूर्वक हैं
| आशा है अब तुम्हारा मन छात्रावास में लग गया होगा |
तुमने वातावरण के अनुसार अपने आप को बदल लिया होगा |
भाई,
यह पहला अवसर है जब तुम , हम सबसे अलग रहे हो |हमें
तो तुम्हारी कमी खल ही रही है, लेकिन तुम भी अकेलापन महसूस कर रहे होगे |
ऐसे में तुम्हें अच्छे मित्र की आवश्यकता है | लेकिन तुम वहाँ मित्र
बनाने में विशेष सावधानी बरतना क्योंकि संगति का प्रभाव हमारे विचारों तथा
व्यवहारों पर पड़ता है | जैसे लोगों के बीच हम रहते है,
धीरे –धीरे हमारा स्वभाव भी वैसा ही हो जाता है | अच्छे आचार-विचार वाले
लोगों के साथ रहकर तुम उनसे बहुत कुछ सीख पाओगे तथा सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी |
यदि तुम्हारी संगति अच्छी न रही, तो तुम्हें लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो पाएगी |हम
सभी से दूर रहने का उद्देश्य तुम्हें ध्यान रहना चाहिए |
अंत में, मैं तुम्हें एक बार फिर यही कहूंगा कि तुम सत्संगति में रहना ,ताकि
माता जी और पिता जी का स्वप्न पूरा हो सके |
हम सभी की शुभकामनाएँ तुम्हारे साथ हैं | माता जी और पिता जी की ओर से ढेर सारा प्यार |
तुम्हारा अग्रज
आशुतोष
उत्तम।
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